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 केले लेकर अपने रिश्तेदारों के घर पहुँचने वाली आख़री पीढ़ी भी अब समाप्ति के कगार पर है शायद l अब तो रिश्तेदारों की ऐसी स्थिति हो गई है कि ख़ाली हाथ हिलाते हुए पहुँचते हैं औऱ घर में घुसते ही कराह उठते हैं...." बुआ इस फोन का चार्जर है क्या ?" जब 2 रूपए प्रति मिनट काल लगती थी और किसी किसी के पास फोन होते थे l  सब एक दूसरे को फोन करते थे। आज प्रत्येक व्यक्ति के पास फोन है सबकी काल फ्री है फिर भी कोई किसी को फोन नहीं करता सिवाय जरुरत पड़ने के अलावा l    जब इतने साधन नहीं थे रिश्तेदारों के घर पर कई कई दिन रहते थे। आज लगभग सभी के पास मोटरसाइकिल है सिर्फ एक दो घण्टे के लिए रुकते हैं। वो भी क्या दिन थे बड़ी ख़ुशी होती थी जब कोई रिश्तेदार घर पर आता था  इस टेक्नोलॉजी के दौर में भले ही हम बहुत आगे निकल आएं हो  परन्तु रिश्तों को बहुत पीछे छोड़ आएं हैं। :सर्वे भवन्तु सुखिनः