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कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

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Bhinmal ki Mojadi

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बागोड़ा - भीनमाल की जूतियां राजस्थान में ही नही विदेशों में भी फेमस है, देश के बाहर बड़े शासकीय समारोह में भीनमाल की जूतियों की खनक देखी जा सकती है । जूतियां अपनी शान बयां करती है, !!

आज नवरात्रि के आठवें दिन होती है महाष्टमी, इस दिन करें महागौरी की पूजा

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सफेद व पीले पुष्प बेहद प्रिय हैं। ऐसे में उन्हें यही अर्पित करें। फिर मंत्रों का जाप करें। इसके बाद मध्य रात्रि में इनकी पूजा करें। इस दिन कन्याओं को खाना भी खिलाया जाता है। कहा जाता है कि 2 वर्ष से लेकर 10 वर्ष तक की कन्या को ही पूजा जाना चाहिए। इस दिन मां की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन के सभी दुख दूर हो जाते हैं। मां महागौरी बीज मंत्र: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:। महागौरी मंत्र: माहेश्वरी वृष आरूढ़ कौमारी शिखिवाहना। श्वेत रूप धरा देवी ईश्वरी वृष वाहना।। ओम देवी महागौर्यै नमः। महागौरी माता की आरती: जय महागौरी जगत की माया। जया उमा भवानी जय महामाया।। हरिद्वार कनखल के पासा। महागौरी तेरा वहां निवासा।। चंद्रकली और ममता अंबे। जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।। भीमा देवी विमला माता। कौशिकी देवी जग विख्याता।। हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।। सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया।। बना धर्म सिंह जो सवारी में आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।। तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आनेवाले का संकट मिटाया।। शनिवार को तेरी पूजा जो करता। मां बिग...

सातवें दिन होती है मां कालरात्रि की पूजा,

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शारदीय नवरात्रि का आज यानी 23 अक्टूबर, 2020 सातवां दिन है। आज का दिन मां कालरात्रि को समर्पित होता है। मान्यता है कि मां कालरात्रि भक्तों को अभय वरदान देने के साथ ग्रह बाधाएं भी दूर करती हैं। मां कालरात्रि की अराधना से आकस्मिक संकटों से मुक्ति मिलती है। जानिए शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की कृपा पाने के लिए कैसे करें पूजा, भोग, शुभ रंग और मंत्र- मां कालरात्रि का ऐसा है स्वरूप- मां कालरात्रि का शरीर अंधकार की तरह काला है। मां के बाल लंबे और बिखरे हुए हैं। माता के गले में पड़ी माला बिजली की तरह चमकती है। मां कालरात्रि के चार हाथ हैं। एक हाथ में माता ने खड्ग (तलवार). दूसरे में लौह शस्त्र, तीसरे हाथ वरमुद्रा और चौथे हाथ अभय मुद्रा में है। मां कालरात्रि की ऐसे करें पूजा- मां की कृपा प्राप्त करने के लिए मां को गंगाजल, गंध, पुष्प, अक्षत, पंचामृत से पूजा की जाती है। मां कालरात्रि को लाल रंग की चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता हैं   भक्तों को देती हैं मां कालरात्रि ये आशीर्वाद मान्यता है कि नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करने व...

नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है।

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Jangid जानिए कैसे करें मां कात्यायिनी की पूजा? क्या है विधि, मंत्र और क  था मां कात्यायनी का स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है। इनकी चार भुजाएं हैं। मां कात्‍यायनी सिंह की सवारी करती हैं और उनका पसंदीदा रंग लाल है नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। मान्‍यता है कि मां कात्‍यायनी की पूजा करने से शादी में आ रही बाधा दूर होती है और भगवान बृहस्‍पति प्रसन्‍न होकर विवाह का योग बनाते हैं। यह भी कहा जाता है कि अगर सच्‍चे मन से मां की पूजा की जाए तो वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। जानिए नवरात्रि के छठे दिन की पूजा विधि, व्रत कथा, आरती, मंत्र, मुहूर्त… पूजा विधि:  नवरात्रि के छठे दिन यानि कि षष्‍ठी को स्‍नान कर लाल या पीले रंग के वस्‍त्र पहनें। सबसे पहले घर के पूजा स्‍थान या मंदिर में देवी कात्‍यायनी की मूर्ति अथवा तस्वीर स्‍थापित करें। अब गंगाजल से छिड़काव कर शुद्धिकरण क...

नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है।

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नवरात्रि के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान करने वाली हैं। देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है। शिव और पार्वती के दूसरे और षडानन (छह मुख वाले) पुत्र कार्तिकेय का एक नाम स्कंद है क्योंकि यह सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी हैं, इसलिये इनके चारों ओर सूर्य जैसा अलौकिक तेजोमय मंडल दिखाई देता है। स्कंदमाता की उपासना से भगवान स्कंद के बाल रूप की भी पूजा होती है। स्वरूप मां के इस रूप की चार भुजाएं हैं। इन्होंने अपनी दाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा से स्कंद अर्थात कार्तिकेय को पकड़ा हुआ है। निचली दाएं भुजा के हाथ में कमल का फूल है। बायीं ओर की ऊपरी भुजा में वरद मुद्रा है और नीचे दूसरे हाथ में सफेद कमल का फूल है। सिंह इनका वाहन है। महत्त्व नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता की पूजा विशेष फलदायी होती है। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए, जिससे कि ध्यान वृत्ति एकाग्र हो सके। यह शक्ति परम शांति और सुख का अनुभव कराती है। मां की कृपा से बुद्...

नवरात्रि का चौथा दिन, कुष्मांडा देवी

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अष्ट भुजा हैं कुष्मांडा देवी कुष्मांडा देवी को अष्टभुजा भी कहा जाता है. इनकी आठ भुजाएं हैं. मां ने अपने हाथों में धनुष-बाण, चक्र, गदा, अमृत कलश, कमल और कमंडल धारण किया हुआ है. वहीं एक और हाथ में मां के हाथों में सिद्धियों और निधियों से युक्त जप की माला भी है. इनकी सवारी सिंह है. मां कुष्मांडा की कथा पौराणिक कथा के अनुसार मां कुष्मांडा का अर्थ होता है कुम्हड़ा. मां दुर्गा असुरों के अत्याचार से संसार को मुक्त करने के लिए कुष्मांडा का अवतार लिया था. मान्यता है कि देवी कुष्मांडा ने पूरे ब्रह्माण्ड की रचना की थी. पूजा के दौरान कुम्हड़े की बलि देने की भी परंपरा है. इसके पीछे मान्यता है ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और पूजा सफल होती है. मां कुष्मांडा की पूजा विधि नवरात्रि के चौथे दिन सुबह स्नान करने के बाद मां कुष्मांडा स्वरूप की विधिवत करने से विशेष फल मिलता है. पूजा में मां को लाल रंग के फूल, गुड़हल या गुलाब का फूल भी प्रयोग में ला सकते हैं, इसके बाद सिंदूर, धूप, गंध, अक्षत् आदि अर्पित करें. सफेद कुम्हड़े की बलि माता को अर्पित करें. कुम्हड़ा भेंट करने के बाद मां को दही और हलवा का ...